102: Eid Mubarak: इबादत और दुआ

मेरी इबादत को ऐसे कबूल कर ए खुदा,
के सजदे में झुकूं तो मुझसे जुड़े
हर रिश्ते की जिंदगी संवर जाए।

ईद मुबारक
अनिल और दीपशिखा

1

चाँद निकलेगा तो लोग दुआ मांगेंगे,
हम भी अपने मुकद्दर का लिखा मांगेंगे,
हम तलबगार नहीं दुनिया की दौलत के,
हम रब से सिर्फ आपकी खुशी मांगेंगे।

 

2

तेरे पास में बैठना भी इबादत
तुझे दूर से देखना भी इबादत….
न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा
तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत….

 

3

खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती,
तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती.

 

4

उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो,
धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता है…

 

5

नीयत ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिये,
इश्क और इबादत में नीयत साफ रखिये.

 

6

सर झुकाने की खूबसूरती भी,
क्या कमाल की होती है,
धरती पर सर रखा और,
दुआ आसमान में कुबूल हो जाती हे।

 

7

दुआ तोह दिल से मांगी जाती है,
ज़ुबां से नहीं

क़बूल तोह उसकी भी होती है,
जिस की ज़ुबान नहीं होती।

 

8

उल्फत-ए-यार में खुदा से और माँगू क्या,
ये दुआ है कि तू दुआओं का मोहताज न हो।

 

09

कुछ लोग किस्मत की तरह होते हैं जो दुआ से मिलते हैं…
और कुछ लोग दुआ की तरह होते हैं
जो किस्मत बदल देते हैं…

 

10
या खुदा मेरी दुआओं में इतना असर कर दे,
खुशियाँ उसे दर्द उसका मुझे नजर कर दे,

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